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01 जून 2002 के बाद दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी, ACP/MACP और पदोन्नति के नियम | राजस्थान 2026

01 जून 2002 के बाद दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी, ACP/MACP एवं पदोन्नति के नियम

राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के अनुरूप सरकारी सेवाओं में दो से अधिक संतान संबंधी नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण के साथ-साथ सरकारी सेवा में अनुशासन बनाए रखना है।

यदि किसी अभ्यर्थी या सरकारी कर्मचारी की 01 जून 2002 के बाद दो से अधिक संतान है, तो इसका प्रभाव उसकी सरकारी नौकरी, नियुक्ति, पदोन्नति, ACP/MACP तथा वेतन वृद्धि पर पड़ सकता है। हालांकि समय-समय पर सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण छूट (Relaxation) भी प्रदान की हैं।


मुख्य बातें (Quick Summary)

  • 01.06.2002 के बाद दो से अधिक संतान होने पर सामान्यतः नई सरकारी भर्ती के लिए पात्रता समाप्त हो जाती है।
  • विधवा एवं विवाह-विच्छिन्न महिलाओं को 2023 से विशेष छूट दी गई है।
  • पहली संतान दिव्यांग होने पर उसे गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
  • दूसरी डिलीवरी में जुड़वां बच्चे होने पर उन्हें एक इकाई माना जाएगा।
  • दो से अधिक संतान होने पर ACP/MACP में 3 वर्ष की देरी हो सकती है।
  • पदोन्नति (DPC) होती रहेगी, लेकिन कुछ मामलों में वेतन वृद्धि का नकद लाभ नहीं मिलेगा।

1. सरकारी नौकरी में भर्ती पर प्रभाव

यदि किसी व्यक्ति की 01 जून 2002 या उसके बाद दो से अधिक संतान है, तो वह सामान्यतः राजस्थान सरकार की नई भर्ती में पात्र नहीं होगा।


2. विधवा एवं विवाह-विच्छिन्न महिलाओं को छूट

कार्मिक विभाग की 16 मार्च 2023 की अधिसूचना के अनुसार:

  • विधवा महिला
  • विवाह-विच्छिन्न (Divorced) महिला

यदि उनकी दो से अधिक संतान भी हैं, तब भी उन्हें राजकीय सेवा में आवेदन एवं नियुक्ति के लिए छूट प्रदान की गई है।


3. अनुकंपा नियुक्ति में नियम

यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है—

  • मृतक की पत्नी (विधवा) स्वयं आवेदन करती है, तो दो से अधिक संतान होने पर भी नियुक्ति मिल सकती है।
  • अन्य आश्रितों पर यह छूट लागू नहीं होगी।

4. पहली संतान दिव्यांग होने पर

यदि प्रथम प्रसव से जन्मी संतान दिव्यांग है, तो उसे संतान की इकाई में नहीं गिना जाएगा।

यह प्रावधान 24 फरवरी 2011 से प्रभावी है।


5. दूसरी डिलीवरी में जुड़वां बच्चे होने पर

यदि—

  • पहली डिलीवरी में एक बच्चा है।
  • दूसरी डिलीवरी में जुड़वां बच्चे होते हैं।

तो दूसरी डिलीवरी से जन्मे दोनों बच्चों को एक इकाई माना जाएगा।

लेकिन—

यदि पहली डिलीवरी में ही जुड़वां बच्चे हुए हों, तो उन्हें दो संतान माना जाएगा और बाद में जन्म लेने वाला बच्चा तीसरी संतान माना जाएगा।


6. पुनर्विवाह की स्थिति

यदि किसी कर्मचारी ने वैधानिक रूप से पुनर्विवाह किया है, तो एकल प्रसव की विशेष छूट उपलब्ध है।

ऐसी स्थिति में MACP या पदोन्नति प्रभावित नहीं होगी।


7. ACP/MACP पर प्रभाव

वर्तमान नियमों के अनुसार—

  • दो से अधिक संतान होने पर ACP/MACP सामान्य नियत तिथि से 3 वर्ष बाद मिलेगी।
  • यह व्यवस्था वित्त विभाग के 18 दिसंबर 2020 के आदेश के अनुसार लागू है।
  • यह प्रभाव केवल एक बार लागू होता है।

8. पदोन्नति (Promotion)

दो से अधिक संतान होने पर—

  • DPC समय पर होगी।
  • लेकिन तीन वार्षिक वेतन वृद्धि का केवल काल्पनिक (Notional) लाभ मिलेगा।
  • नकद लाभ देय नहीं होगा।

9. गोद देने का प्रभाव

यदि किसी संतान को विधिक प्रक्रिया के अनुसार गोद दे दिया जाता है, तो भी संतानों की संख्या की गणना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


महत्वपूर्ण आदेश

  • 20 जून 2001 – दो से अधिक संतान संबंधी मूल आदेश
  • 24 फरवरी 2011 – दिव्यांग संतान संबंधी प्रावधान
  • 18 दिसंबर 2020 – ACP/MACP नियम
  • 09 दिसंबर 2022 – CCA 17 के दंड का ACP पर प्रभाव
  • 16 मार्च 2023 – विधवा एवं विवाह-विच्छिन्न महिलाओं को छूट

FAQ

प्रश्न: 01 जून 2002 के बाद तीन संतान होने पर क्या सरकारी नौकरी मिल सकती है?

उत्तर: सामान्यतः नहीं, लेकिन विधवा एवं विवाह-विच्छिन्न महिलाओं को 2023 से विशेष छूट प्रदान की गई है।

प्रश्न: दूसरी डिलीवरी में जुड़वां बच्चे होने पर कितनी संतान मानी जाएगी?

उत्तर: यदि पहली डिलीवरी में एक संतान थी, तो दूसरी डिलीवरी में जन्मे जुड़वां बच्चों को एक इकाई माना जाएगा।

प्रश्न: पहली संतान दिव्यांग होने पर क्या नियम है?

उत्तर: पहली दिव्यांग संतान को संतान की इकाई में शामिल नहीं किया जाएगा।

प्रश्न: दो से अधिक संतान होने पर ACP कब मिलेगी?

उत्तर: सामान्यतः नियत तिथि से 3 वर्ष बाद।

प्रश्न: क्या पदोन्नति रुक जाती है?

उत्तर: नहीं। DPC समय पर होगी, लेकिन कुछ मामलों में वेतन वृद्धि का नकद लाभ प्रभावित हो सकता है।

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