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अदेय अवकाश (Leave not due) - नियम 93(3)

अदेय अवकाश (नियम 93(3) के अर्न्तगत)

नियम 93(3) के अनुसार सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति से पूर्व के अवकाशों के मामलों को छोडकर स्थायी सेवा के राज्य कर्मचारी को निम्नलिखित शर्तों पर अदेय अवकाश (Leave not due) स्वीकृत किया जा सकता है:-

(a) अवकाश स्वीकृत करने वाला प्राधिकारी यदि संतुष्ट हो जाये कि ऐसा कर्मचारी अदेय अवकाशों की समाप्ति पद वापिस हाजिर हो जायेगा । रूपान्तरित अवकाश (Commuted Leave)स्वीकृत किया जाये तो उसके एवज में दुगुनी संख्या में अर्द्ध-वेतन अवकाश लेखें से कम कर दिये जावे।

(b) अदेय अवकाश उतने अर्द्ध-वेतन अवकाश तक ही सीमित होंगें जो वह ऐसे अवकाशों के बाद उतनी संख्या में अर्जित कर सके।

(c) सम्पूर्ण सेवा काल में अदेय अवकाश 360 दिन से ज्यादा नहीं दिये जायेंगे जिनमें से एक समय में 90 दिन से अधिक नहीं होगा।1180 दिन का अदेय अवकाश चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आधार पर व शेष अन्य आधार पर स्वीकृत किये जा सकते ।चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आधार पर अदेय अवकाश प्राप्त करने के लिये प्राधिकृत चिकित्सक से चिकित्सा प्रमाण-पत्र प्राप्त कर प्रस्तुत करना होगा।

(d) अदेय अवकाश स्वीकृत किये जाने पर वह कर्मचारी के अर्द्ध वेतन अवकाशों के खाते में नामे लिखे जायेंगें तथा उनका समायोजन ऐसे कर्मचारी द्वारा भविष्य में अर्जित किये जाने वाले अर्द्ध वेतन अवकाशों से किया जायेगा।

नियम 93(4) के अनुसार, भर्ती एवं अन्य सेवा शर्तों के अनुसार नियुक्त अस्थायी सरकारी कर्मचारी को रूपान्तरित अवकाश एवं अदेय अवकाश 3 वर्ष का सेवाकाल पूर्ण करने पर देय होंगें।

1. नियम 93(5) के अनुसार, यदि किसी सरकारी कर्मचारी को रूपान्तरित अवकाश या अदेय अवकाश स्वीकृत किया जावे और वह सेवा में रहते हुऐ मृत्यु हो जाये या वह राजस्थान सिविल सेवाएं (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 35 के तहत असमर्थता के आधार पर सेवानिवृत्त कर दिया जावे या नियम 53 के अनुसार अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया जाये तो उससे अवकाश वेतन संबंधी कोई वसूली नहीं की जायेगी चाहे एसी वसूली बनती हो। अन्य सभी मामलों में जैसे सेवा से त्याग-पत्र देने, स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति प्राप्त करने, सेवा से निष्कासित करने या बर्खास्त करने आदि के मामला अवकाश वेतन की वसली अवश्य की जायेगी यदि ऐसी वसूली नियमानर्तगत बनती है।

नियम 97(1) (क) के अनुसार कोई अधिकारी अदेय अवकाश पर हो तो वह अवकाश वतन के रूप में उस वेतन के समान अवकाश वेतन प्राप्त करने का अधिकारी है जो वह अवकाश पर प्रस्थान करने से पूर्व के दिन प्राप्त कर रहा था। नियम (97)(2) के अनसार ₹59000 से अधिक अवकाश वेतन प्राप्त नहीं कर सकेगा।

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