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अवकाश > अवकाश की सामान्य शर्ते

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पुनर्नियोजन या सेवा में बहाली पर सेवानिवृत्ति पूर्व की सेवा से संबंधित अवकाशः नियम 58


पुनर्नियोजन या सेवा में बहाली पर सेवानिवृत्ति पूर्व की सेवा से संबंधित अवकाशः नियम 58(क) के अनुसार जब एक कर्मचारी जिसे क्षतिपूरक (Compensation) अथवा अयोग्यता पेन्शन/ग्रेच्यटी (Invalid Pension-Gratuity) पर राज्य सेवा छोड देता है और सक्षम स्वीकृति से उसे राज्य सेवा में पुनः किसी पद पर नियुक्त कर दिया जाय और इसके परिणामस्वरूप ऐसा कर्मचारी उसे स्वीकृत क्षतिपूरक, अयोग्यता पेन्शन अथवा ग्रेच्चूटी के रूप में प्राप्त सेवा लाभों की राशि वापिस राजकोष में जमा करा दे या उसकी स्वीकृत पेन्शन पूर्णतया स्थगित कर दी जावे जिससे उसकी पूर्व की सेवाएं अन्तिम रूप से सेवानिवृत्ति पर पेंशन योग्य हो जाती है तो सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से उसकी गत सेवाएँ उस सीमा तक अवकाश उपार्जन के लिये गिनी जा सकती है।

नियम 58(ख) के अनुसार राज्य सेवा से निष्कासित अथवा बर्खास्त कर्मचारी, यदि अपील अथवा पुनरावलोकन के कारण, सेवा में पुनः नियुक्त कर दिया जावे तो वह अपनी पूर्व की सेवाओं को अवकाश के लिये सम्मिलित कराने का अधिकारी हो जायेगा।

अंकेक्षा अनुदेश संख्या 1 के अनुसार एक कर्मचारी जिसे अधिवार्षिकी आयु अथवा अन्य कारणों से सेवा-निवृत्त कर दिया जावे और बाद में उसे उस पद पर नियुक्त किया जावे तो साधारणतया उसकी पुनः नियुक्ति को नवीन एवं अस्थाई रूप से की गई नियुक्ति समझा जाना चाहिये तथा उस अवधि में उसका अवकाश, अस्थायी राज्य कर्मचारियों पर प्रभावशील नियमों के अनुसार दिये जाने चाहिये।

ऐसे मामलों में जहाँ राज्य सेवा से दिये गये त्यागपत्र को राजस्थान सेवा नियम 208(ख) के अनुसार सेवा से त्यागपत्र नहीं समझा जाता हो वहाँ अवकाश के मामले में भी उस अवधि को सेवा की निरंतर अवधि मानकर लाभ दिया जाना चाहिये।

Rajasthan service rule 58 -- Leave in respect of service prior to discharge on reemployment or reinstatement.—(a) If a Government servant, who quits the public service on compensation or invalid pension or gratuity is re-employed and if his gratuity is thereupon refunded or his pension held wholly in abeyance, his past service thereby becoming pensionable on ultimate retirement, he may, at the discretion of the authority sanctioning the reemployment and to such extent as that authority may decide count his former service towards leave. (b) A Government servant who is dismissed or removed from the public service, but is reinstated on appeal or revision, is entitled to count his former service for leave.

Audit Instructions (1) The re-employment of a person who has retired on superannuation or retiring pension is generally an exceptional and temporary expedient. In such cases the service of the re-employed person should be regarded as temporary and his leave during the period of re-employment should be regulated by the rules applicable to temporary Government servants/

Government of Rajasthan's Decision:- In cases where resignation of public service is not deemed as resignation within the meaning of rule 208 (b) of the Rajasthan Service Rules continuity of Service benefit should be allowed in the matter of leave also.

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